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गोरखपुर के गांव में बनी ‘बैदा’: देसी साइंस-फिक्शन की नई उड़ान

भारतीय सिनेमा में जब भी हॉरर-फैंटेसी की बात होती है, तो ‘तुम्बाड़’ का नाम सबसे पहले ज़ेहन में आता है। लेकिन अब एक नई फिल्म ‘बैदा’ ने इस जॉनर में तहलका मचा दिया है। हॉलीवुड जैसे कॉन्सेप्ट और ‘तुम्बाड़’ जैसे विजुअल्स के साथ, ‘बैदा’ दर्शकों के दिलों पर राज कर रही है। फिल्म के निर्देशक और मुख्य अभिनेता सुधांशु राय ने हाल ही में एक इंटरव्यू में फिल्म बनने की कहानी साझा की। आइए जानते हैं इस अनोखी फिल्म की यात्रा के बारे में।

‘बैदा’ की कहानी: पैरेलल यूनिवर्स का रहस्य

‘बैदा’ की कहानी एक पैरेलल यूनिवर्स के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां एक व्यक्ति एक रहस्यमयी दुनिया में प्रवेश करता है। यहां उसे पिशाचों और अद्भुत प्राणियों का सामना करना पड़ता है। फिल्म की कहानी दर्शकों को एक नई और अनोखी दुनिया में ले जाती है, जो भारतीय सिनेमा में कम ही देखने को मिलती है।

निर्देशक की दृष्टि: हॉलीवुड से प्रेरणा, देसी तड़का

सुधांशु राय ने बताया कि ‘बैदा’ का कॉन्सेप्ट हॉलीवुड की साइंस-फिक्शन फिल्मों से प्रेरित है, लेकिन उन्होंने इसमें भारतीय संस्कृति और परंपराओं का समावेश किया है। उनका मानना है कि भारतीय दर्शक अब नए और अनोखे कॉन्सेप्ट्स को अपनाने के लिए तैयार हैं, और ‘बैदा’ इसी दिशा में एक कदम है।

शूटिंग की चुनौतियां: सीमित बजट, असीमित कल्पना

फिल्म की शूटिंग गोरखपुर के गांवों में की गई है, जहां सीमित संसाधनों के बावजूद टीम ने अद्भुत विजुअल्स क्रिएट किए हैं। सुधांशु राय ने बताया कि उन्होंने स्थानीय कलाकारों और तकनीशियनों की मदद से फिल्म को जीवंत बनाया। उनका कहना है कि यदि आपके पास असीमित कल्पना शक्ति हो, तो सीमित बजट भी बाधा नहीं बनता।

‘तुम्बाड़’ से तुलना: एक सम्मान

‘बैदा’ की विजुअल्स की तुलना ‘तुम्बाड़’ से की जा रही है, जो सुधांशु राय के लिए एक सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि ‘तुम्बाड़’ ने भारतीय सिनेमा में एक नया मानदंड स्थापित किया है, और यदि ‘बैदा’ की तुलना उससे की जा रही है, तो यह उनकी टीम के लिए गर्व की बात है।

दर्शकों की प्रतिक्रिया: नई सोच की सराहना

फिल्म को दर्शकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है। लोगों ने फिल्म की कहानी, विजुअल्स और निर्देशन की तारीफ की है। ‘बैदा’ ने यह साबित किया है कि भारतीय सिनेमा में भी हॉलीवुड स्तर की साइंस-फिक्शन फिल्में बनाई जा सकती हैं, जो दर्शकों को बांधे रख सकें।

भविष्य की योजनाएं: नई कहानियों की खोज

सुधांशु राय ने बताया कि ‘बैदा’ की सफलता ने उन्हें और भी नई और अनोखी कहानियों पर काम करने के लिए प्रेरित किया है। वह भारतीय सिनेमा को नए आयाम देने के लिए प्रतिबद्ध हैं और दर्शकों के लिए और भी रोमांचक प्रोजेक्ट्स लाने की योजना बना रहे हैं।

निष्कर्ष: ‘बैदा’ का प्रभाव

‘बैदा’ ने भारतीय सिनेमा में साइंस-फिक्शन और फैंटेसी जॉनर को एक नई दिशा दी है। फिल्म ने यह साबित किया है कि यदि कहानी में दम हो और निर्देशक की दृष्टि स्पष्ट हो, तो सीमित संसाधनों में भी उत्कृष्ट सिनेमा बनाया जा सकता है। ‘बैदा’ जैसी फिल्मों की सफलता से भारतीय सिनेमा में नए और अनोखे कॉन्सेप्ट्स को प्रोत्साहन मिलेगा, जो दर्शकों को नए अनुभव प्रदान करेंगे।

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